दीपावली के उपलक्ष में सबको प्रण लेना चाहिये कि सदा नेक रास्ते पर चलेंगें, सदा शुद्ध विचार रखेंगे, अपनी वाणी में मिठास रखेंगे – इतनी मिठास कि जिसके भी साथ हों वो भी प्रभावित हो जाए | हम सब इनको अपने जीवन का सिद्धांत बनाएं | इन विचारों को अपने जीवन में ग्रहण करें | स्वामीजी सदैव अपने भक्तों की हरेक नेक इच्छा को पूरा करतें आएं हैं और हमेशा करतें रहेंगें | आमीन |
क्षमा कर देना एक इंसान की बहुत अच्छी आदत है | अगर कोई तुम्हारे साथ बुरा करे, उसे अपने दिल में मत रखो और उसके बारे में सोचते मत रहो | जितना तुम उसके बारे में सोचते हो, उतना ही अपने को नुकसान पहुँचाते हो क्योंकि जो हुआ है उसको सोचते रहने से उतना ही वह बात दिमाग में गढ़ जाती है और तुम्हे दुःख पहुंचाती है |