नारी सम्मान

।। यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।।

(जहाँ नारी का सम्मान होता है वहीं देवता भी भृमण करते हैं ।)

हमारे समाज में नारी की अत्यन्त सशक्त भूमिका रही है । नारीशक्ति की प्रबलता को पहचानना परम् आवश्यक है ।
एक सूक्ष्म सा उदाहरण है कि एक इंसान छोटी सी पथरी होने से भी दर्द से कहरा उठता है और उस पीड़ा को सह नहीं पाता । वहीं एक नारी अपने पेट मे 9 मास तक शिशु को रखती है और सारे कष्ट व प्रसव पीड़ा को सहजतापूर्ण वहन कर लेती है ।
हर दुःख दर्द, तकलीफ को सहकर, मुस्कुराते हुए जीवन को आगे बढ़ाना नारी से सीखा जा सकता है ।
परिवार को सम्भालने से लेकर समाज को सभ्य बनाना हो या शिक्षा का ज्ञान बाँटना हो, सब कुछ नारी बड़ी सुगमता से संयोजित कर लेती है ।

आज के आधुनिक युग में प्रत्येक क्षेत्र में नारी की भूमिका अग्रणीय रहती है ।
नारी जननी है, सृष्टि में शक्ति का प्रतीक है ।
सर्वदा, सर्वत्र नारी का सम्मान हो ।
नारी की आन, बान व शान की जिम्मेदारी का दायित्व सम्पूर्ण समाज व हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है ।