डगर कठिन है भलाई की

भलाई करना बहुत कठिन है और बुराई करना आसान । किसान खेत में फसल उगाता है, अन्न से सँसार के प्राणियों का पेट भरता है। खेती करना या फसल उगाना बहुत मुश्किल कार्य है लेकिन उसी फसल को उजाड़ना आसान काम है, यानि कि अच्छाई कठिन व बुराई आसान ।।

इसी प्रकार इमारत को खड़ा करने में कड़ा परिश्रम, महीनों, वर्षों का समय लग जाता है, इसी भलाई के कारण अनगिनत लोग मकानों में रह पाते हैं । वहीं उस बनी हुई इमारत को ढहा देना चन्द घण्टों, कुछ क्षणों की बुराई का नतीजा है ।।
यह सत्य है कि भलाई कठिन है किन्तु इसमें  उत्साह है, तरक्की है, अच्छाई है।
बुराई से घृणा उतपन्न होती है, जिससे मन में भी दोषपूर्ण भाव आ जाता है।

“सदा भलाई करो और बुराइयों को छोड़ो ” ।।